देहरादून
उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता और वक्फ बोर्ड चेयरमैन शादाब शम्स का बयान
उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता को लेकर चल रही प्रक्रिया और मीडिया में आई रिपोर्टों के बीच, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी मात्र एक फीसदी मदरसों ने ही शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से मान्यता ली है। राज्य के 452 मदरसों में से अब तक केवल सात मदरसों को ही मान्यता मिल पाई है।
इस स्थिति पर चिंता जताते हुए शादाब शम्स ने स्पष्ट किया है कि कुछ मदरसे अभी इस प्रक्रिया में नामांकित (इररोल्ड) होने को तैयार नहीं हैं, जो कि चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि धामी सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन करने का मुख्य उद्देश्य मदरसों को बेहतर शिक्षा प्रदान करना और बच्चों को विज्ञान व गणित जैसी आधुनिक शिक्षा से जोड़ना था।
शम्स ने कहा कि तमाम मदरसों को अपने पाठ्यक्रम में उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद के सिलेबस को शामिल करना था, जिसमें पहले हिस्से में सामान्य शिक्षा और दूसरे हिस्से में कुरान का (शिक्षा) देने की व्यवस्था थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग और राजनीतिक दल इस सुधारात्मक कदम का विरोध कर रहे हैं और शिक्षा के अधिकार का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय सीमा के भीतर मदरसों ने पंजीकरण नहीं कराया, तो ऐसे संस्थानों को चलने नहीं दिया जाएगा और उनके बच्चों को सामान्य स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा। वक्फ बोर्ड चेयरमैन ने मुस्लिम उलेमाओं से अपील की है कि वे संजीदगी बरतते हुए मदरसों का पंजीकरण उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से कराएं ताकि बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाया जा सके।